ट्रैफिक के जाम में फंसकर गलत दिशा में गाड़ी थोड़ी देर के लिए ले लेना कई ड्राइवरों की आदत बन चुकी है। लेकिन अब यह छोटी सी चूक भारी पड़ रही है। दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक पुलिस सख्ती बरत रही है। गलत साइड चलाने पर न सिर्फ चालान, बल्कि FIR दर्ज हो रही है और वाहन जब्त कर लिया जा रहा है। एक युवा कैब चालक की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है, जिसकी जिंदगी एक पल में उलट गई। आइए जानते हैं पूरी घटना और इसके पीछे के नियम।

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जाम में उल्टी दिशा का लालच
कल्पना करें, शाम का व्यस्त चौराहा। भारी ट्रैफिक में फंसी गाड़ियां, बेसब्र ड्राइवर। यहीं 21 साल के आशीष, जो हाल ही में नई कैब खरीदकर सवारियों के पीछे भाग रहे थे। 6 जनवरी को राजकोट के भिंडर चौक पर उनकी सफेद कार ट्रैफिक की उल्टी दिशा में तेज रफ्तार से दौड़ रही थी। टेम्पररी नंबर प्लेट वाली यह कैब किसी इमरजेंसी में लग रही थी। लेकिन ट्रैफिक हेड कांस्टेबल ने फुर्ती दिखाई। शाम 3 बजे से रात 11 बजे तक ड्यूटी पर तैनात यह पुलिसकर्मी ने आशीष को तुरंत रोका। उनके साथी ने मोबाइल पर पूरा वीडियो बना लिया।
आशीष ने सफाई दी कि भारी जाम था। कैब में सवार यात्री को जल्दी पहुंचाना था। आसपास की कुछ गाड़ियां भी गलत साइड ले रही थीं, तो वे भी बहाव में चले गए। पर्सनल इमरजेंसी का हवाला दिया, लेकिन उनके पास वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं था। ड्राइविंग लाइसेंस तो वैध था, पर यह कमी भारी पड़ी। गुजरात में बसे आशीष हरियाणा रजिस्टर्ड कैब चला रहे थे, जो नई खरीदी थी।
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जब्ती ने तोड़ दी कमर
एक पल की गलती ने आशीष की जिंदगी में तूफान ला दिया। पुलिस ने कैब जब्त कर ली। लाइसेंस और वाहन दोनों का सत्यापन मांगा गया। आशीष को गुजरात दौड़ना पड़ा लाइसेंस चेक के लिए, तो हरियाणा पहुंचे रजिस्ट्रेशन के कागजात जुटाने। हफ्तों से उनका समय कट रहा है। कैब न चलने से कमाई रुक गई। रोजगार पर संकट आ गया। यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि हजारों ड्राइवरों के लिए चेतावनी है।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्पष्ट करते हैं कि गलत साइड ड्राइविंग मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गंभीर अपराध है। वीडियो सबूत मिलते ही FIR दर्ज होती है। वाहन जब्ती कोर्ट के आदेश पर ही रिलीज होती है। तब तक मालिक न वाहन चला सकता है, न बेच सकता है। कुछ मामलों में अधिकारी विवेक से छूट दे सकते हैं, लेकिन रिकॉर्डिंग वाले केस में सजा तय। दिल्ली में हाल ही में दर्जनों शिकायतें सामने आई हैं। एडिशनल ट्रैफिक CP के अनुसार, इस साल 35 से ज्यादा FIR हो चुकी हैं। दोषी कोर्ट में पेश होंगे।
पहले चालान, अब सजा का डर
पहले यह उल्लंघन सिर्फ चालान तक सीमित था। पिछले साल दिल्ली पुलिस ने 3 लाख से ज्यादा चालान जारी किए। लेकिन अब पैटर्न बदला है। कैमरे, मोबाइल रिकॉर्डिंग और सख्त पेट्रोलिंग से नियम तोड़ने वाले फंस रहे हैं। खासकर कैब ड्राइवर, डिलीवरी बॉय और दोपहिया वाले निशाने पर। ट्रैफिक जाम में धैर्य खोना भारी पड़ रहा। विशेषज्ञ कहते हैं, वैकल्पिक रूट ऐप्स इस्तेमाल करें, इमरजेंसी में सायरन या हॉर्न से सावधानी बरतें। गलत साइड कभी शॉर्टकट नहीं, बल्कि कानूनी जाल है।
ट्रैफिक अनुशासन से शहर सुगम बन सकता है। ड्राइवरों को समझना होगा एक मिनट की जल्दी महीनों की परेशानी ला सकती है। नियम मानें, सुरक्षित रहें। गाड़ी जब्त होने का दर्द सहने से बेहतर है जाम में रुकना। सड़कें सबकी, जिम्मेदारी भी सबकी!
















