
अगर आप सुबह की शुरुआत ग्रीन टी या हर्बल टी से करते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय की कानूनी परिभाषा में बड़ा बदलाव किया है, अब बाजार में बिकने वाले हर उस पेय पदार्थ को ‘चाय’ (Tea) नहीं लिखा जा सकेगा, जिसे आप अब तक चाय समझते आए हैं।
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क्या है नया नियम?
FSSAI द्वारा 2025 के नए मानकों के अनुसार, ‘चाय’ शब्द का इस्तेमाल केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जो ‘कैमेलिया साइनेंसिस’ (Camellia sinensis) नामक पौधे की पत्तियों, कलियों और कोमल तनों से तैयार किए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से पारंपरिक काली (Black Tea), हरी (Green Tea) और ऊलोंग चाय शामिल हैं।
‘हर्बल टी’ अब नहीं कहलाएगी चाय
बाजार में मिलने वाले कई उत्पाद जिन्हें ‘हर्बल टी’ कहकर बेचा जाता है (जैसे तुलसी, अदरक, या कैमोमाइल का मिश्रण), अब इस श्रेणी से बाहर हो जाएंगे।
- नया नाम: जिन उत्पादों में वास्तविक चाय की पत्तियां नहीं हैं, उन्हें अब ‘हर्बल इन्फ्यूजन’ (Herbal Infusion) या ‘बेवरेज’ के रूप में लेबल करना अनिवार्य होगा।
- मिश्रण पर सख्ती: यदि ग्रीन टी में अन्य जड़ी-बूटियां या सुगंध मिलाई गई है, तो कंपनियों को पैकेट पर स्पष्ट रूप से सामग्री की जानकारी देनी होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
FSSAI का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुमराह होने से बचाना है। अक्सर लोग औषधीय गुणों के नाम पर हर्बल अर्क को ‘चाय’ समझकर खरीदते हैं, जबकि उनमें चाय के वास्तविक तत्व नहीं होते। इस स्पष्टीकरण से मिलावटी और गैर-मानक उत्पादों की बिक्री पर लगाम लगेगी।
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
अब जब आप बाजार से चाय का पैकेट खरीदेंगे, तो आपको लेबल पर ध्यान देना होगा, असली चाय की पहचान उसके वैज्ञानिक नाम और शुद्धता से होगी। कंपनियों को अपने पुराने स्टॉक और लेबलिंग में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं।
खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों की विस्तृत जानकारी के लिए आप FSSAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं और नवीनतम फूड सेफ्टी रेगुलेशंस की जांच कर सकते हैं।
















