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Inspiring Success Story: नौकरी नहीं करनी थी, घर पर शुरू की फैक्ट्री, आज कई लोगों को रोजगार और खुद की मोटी कमाई

देवी प्रसाद शुल्का की सक्सेस स्टोरी सुनकर आपके अंदर भी बिजनेस करने की चाह पैदा हो जाएगी। इन्होने अपने गांव में अपनी जमीन में कपड़े बनाने वाली फैक्ट्री का निर्माण किया और आज लाखों में कमाई कर रहें है। इसके साथ ही गांव के अन्य युवाओं को रोजगार दे रहें हैं।

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छतरपुर जिले के देवी प्रसाद शुल्का की सफलता की कहानी की चर्चा आज हर जगह हो रही है और युवा इनकी स्टोरी से प्रेरित हो रहें हैं। पहले ये टीवी ठीक करने का काम करते थे, इसके बाद इन्होंने गारमेंट फैक्ट्री में में काम किया। लॉकडाउन के दौरान ये अपने घर वापस आ गए और इन्होंने नौकरी करने के बजाय अपनी जमीन पर काम करने का फैसला लिया। इसके बाद इन्होने 20 लाख रूपए का निवेश करके कपड़े बनाने वाली फैक्ट्री की शुरुवात की और आज की बात करें तो ये गांव के 10 लोगों को रोजगार दे रहें हैं। इसके साथ ही हर महीने शानदार कमाई कर रहें हैं।

Inspiring Success Story: नौकरी नहीं करनी थी, घर पर शुरू की फैक्ट्री, आज कई लोगों को रोजगार और खुद की मोटी कमाई

पोस्ट ग्रेजुएट की सफलता की कहानी

देवी प्रसाद ने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली है। उनका कहना है कि उन्हें नौकरी करना पसंद नहीं था इसलिए उन्होंने खुद का व्यापार शुरू किया। उन्हें टीवी मैकेनिक के काम का कई सालों का एक्सपीरियंस है। इसके साथ ग्रेटर नोएडा की एक गारमेंट फैक्ट्री में ढाई साल तक मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में काम करके कपड़ा उद्योग का अनुभव प्राप्त किया।

लॉकडाउन के समय में ये अपने घर वापस आए और इन्होने सोचा कि अब ये अपने गांव में रहकर ही बिजनेस शुरू करेंगे। इसके बाद इन्होने तीन साल पहले से ही कपडे बनाने का काम शुरू किया।

20 लाख का किया निवेश

इस बिजनेस की शुरुवात में देवी प्रसाद ने 1 लाख रूपए का निवेश किया था। इसके बाद 7 लाख की मशीन खरीदीं और रॉ मटेरियल का खर्च मिलाकर टोटल 20 लाख रूपए का खर्चा किया। देवी प्रसाद का कहना है कि इस बिजनेस में शानदार प्रॉफिट है। जितना माल बनाते हैं उतनी ही कमाई कर सकते हैं।

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कुर्ती-प्लाजो से लेकर लोअर-टी-शर्ट

देवी प्रसाद ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में लड़कियों के कुर्ती प्लाजो के साथ टी-शर्ट और लोअर भी बनाए जाते हैं। बच्चों के साइज से लेकर ट्रिपल एक्सेल साइज तक के लोअर बनते हैं। ये बेहतर क्वालिटी के हैं जिनमे डबल सिलाई लगाई जाती है।

उन्होंने लोअर पैंट का खुद का ब्रांड भी बनाया है, इसकी मैन्युफैक्चरिंग भी गांव में ही की जाती है। यह थोक के भाव में व्यापारियों को सामान भेजते हैं।

गांव में रोजगार के मौके

अपना बिजनेस शुरू करके देवी प्रसाद मजबूत और सशक्त बन गए हैं। यह स्वरोजगार करके आत्मनिर्भर बन गए हैं और इसके साथ 8 से 10 लोगों को रोजगार भी दे रहें हैं। ये सभी युवा हुनरवान थे लेकिन इनके पास काम की कमी थी। इनमे से कई तो काम के लिए गांव से शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। अब बाकि युवा अपने गांव में ही कमाई कर रहें हैं।

Author
Divya

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