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भारत पर कुल कितना है विदेशी कर्ज? सबसे बड़ा कर्ज किस देश से लिया है? रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों ने देश के विदेशी कर्ज (External Debt) को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है, रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 के अंत तक भारत का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 747.2 बिलियन डॉलर (करीब ₹63 लाख करोड़ से अधिक) के स्तर पर पहुंच गया है, महज तीन महीनों के भीतर इसमें 11.2 बिलियन डॉलर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है

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भारत पर कुल कितना है विदेशी कर्ज? सबसे बड़ा कर्ज किस देश से लिया है? रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
भारत पर कुल कितना है विदेशी कर्ज? सबसे बड़ा कर्ज किस देश से लिया है? रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों ने देश के विदेशी कर्ज (External Debt) को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है, रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 के अंत तक भारत का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 747.2 बिलियन डॉलर (करीब ₹63 लाख करोड़ से अधिक) के स्तर पर पहुंच गया है, महज तीन महीनों के भीतर इसमें 11.2 बिलियन डॉलर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 

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किससे लिया है सबसे ज्यादा कर्ज?

रिपोर्ट में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह है भारत की कर्ज अदायगी की संरचना। आंकड़ों के अनुसार:

  • सबसे बड़ा कर्जदाता: भारत वर्तमान में विश्व बैंक (World Bank) का दुनिया में सबसे बड़ा कर्जदार बनकर उभरा है। विश्व बैंक से लिया गया कर्ज लगभग 39.3 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच चुका है।
  • कमर्शियल बोरोंग: कुल कर्ज का सबसे बड़ा हिस्सा ‘कमर्शियल बोरोंग’ (वाणिज्यिक उधार) का है, जो कुल ऋण का लगभग 39.6% है।
  • डॉलर का दबदबा: भारत के कुल कर्ज का 53.8% हिस्सा अमेरिकी डॉलर में है। इसके बाद भारतीय रुपया (30.6%) और जापानी येन (6.6%) का नंबर आता है। 

राहत की बात: GDP अनुपात में गिरावट

भले ही कर्ज का कुल आंकड़ा बढ़ा है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत भी मिला है, जून 2025 में भारत का ‘विदेशी कर्ज-जीडीपी अनुपात’ घटकर 18.9% रह गया है, जो मार्च 2025 में 19.1% था, यह दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था की विकास दर कर्ज की तुलना में संतुलित बनी हुई है। 

विदेशी मुद्रा भंडार है सुरक्षा कवच

RBI की रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) इतना मजबूत है कि वह कुल विदेशी कर्ज के 93.6% हिस्से को कवर कर सकता है, इसका मतलब है कि कर्ज बढ़ने के बावजूद भारत की स्थिति फिलहाल स्थिर है और किसी बड़े आर्थिक संकट का खतरा कम है। 

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कर्ज बढ़ने का मुख्य कारण?

विशेषज्ञों के अनुसार, कर्ज में इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं (जैसे येन और यूरो) के मूल्य में आया उतार-चढ़ाव है, इसे आर्थिक शब्दावली में ‘वैल्यूएशन इफेक्ट’ कहा जाता है।

अधिक जानकारी और आंकड़ों के विश्लेषण के लिए आप भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

How Much Debt Does India Have
Author
Divya

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