घर में चाहे कितने भी भाई हो अथवा बहन संपत्ति को लेकर विवाद और झगड़े तो होते ही रहते हैं। यह विवाद की बड़ी जड़ बन जाती है अगर परिवार में एक ही पिता के कई बेटे हो। प्रॉपर्टी के लिए रिश्ते नाते भूल जाते हैं और सगे भाई दुश्मन बन जाते हैं। जब तक भाइयों के बीच सम्पति का बंटवारा बराबर नहीं होता है तब तक विवाद खत्म होना मुश्किल है।
अगर आप भी ऐसे ही विवाद में फंसे हैं तो आपको पैतृक और स्व-अर्जित संपत्ति के बंटवारे से जुड़े नियमों को समझ लेना चाहिए। आइए आज इस लेख में आप इन सभी नियम कानून को अच्छे से जान सकेंगे।

Table of Contents
पैतृक संपत्ति के क्या अधिकार हैं?
पैतृक संपत्ति केवल अकेले व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे परिवार की होती है। यह दादा अथवा परदादा के विरासत में मिलती है, इसमें परिवार के सभी सदस्यों का हक लगता है। आइए इनके नियम को जानते हैं।
- बेटों को इस पोर्पेर्टी पर जन्म से ही बराबर हक दिया जाता है।
- हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत विवाहित बेटियों को बेटों के बराबर सम्पति में अधिकार मिलता है।
- पिता के वसीयत बनाने अथवा न बनाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि बंटवारा कानून के हिसाब से किया जाएगा जिसमें वारिसों को बराबर हक मिलता है।
- अगर पिता के एक बेटे की मौत होती है सूस्का अधिकार उसके बच्चों को दिया जाता है।
- पैतृक संपत्ति को एक अकेला व्यक्ति अपनी मर्जी से नहीं बेच पाएगा, इसके लिए परिवार के सभी सदस्यों की अनुमति लेनी पड़ती है।
यह भी देखें- हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! विवाहित संतान को पिता की संपत्ति पर अधिकार नहीं! बिना अनुमति नहीं कर सकते इस्तेमाल
स्व-अर्जित संपत्ति का बंटवारा के नियम
पिता ने अपनी मेहनत और कमाई से जो संपत्ति अथवा घर बनाया है उसे स्वअर्जित सम्पति कहते हैं। इस प्रॉपर्टी के मालिक पिता ही होंगे और उनका ही पूरा क़ानूनी अधिकार होता है।
पिता अपनी मर्जी के हिंसा से अपनी स्व-अर्जित संपत्ति का बंटवारा कर सकते हैं इसके लिए कानून की जरुरत नहीं है। पिता के अगर चार बेटे हैं और वह एक बेटे को ही अपनी सम्पति देता है अथवा किसी को भी नहीं देना चाहता है तो यह उसके फैसले के ऊपर निर्भर करेगा।
अगर पिता ने पहले से ही अपनी सम्पति की वसीयत बना दी है तो फिर बंटवारा भी उसकी के हिसाब से किया जाता है। अगर वसीयत तय नहीं हुई है और पिता की मृत्यु हो जाती है तो यह मामला कोर्ट में चला जाता है। अब कोर्ट द्वारा ही बेटों और बेटियों को बराबर हिस्सा देने का निर्णय लेना होता है।
पिता अपने जीवित रहते रजिस्ट्री अथवा गिफ्ट डीड के माध्यम से अपने बेटों-बेटियों को संपत्ति से सकते हैं अथवा बाँट सकते हैं। कोई जरुरी नहीं है कि बेटों को ही सम्पति देनी है पिता पूरी सम्पति को दान भी कर सकते हैं।
















