Join Contact

सोने के भाव बिकेगा आपके खेत का ‘केसर’! मिट्टी नहीं, अब हवा में उगाएं करोड़ों की फसल, देखें नई इंडोर तकनीक

केसर की खेती आज किसानों के लिए मुनाफे का सुनहरा मौका बन रही है। ठंडी जलवायु और दोमट मिट्टी में उगाई जाने वाली यह फसल सिर्फ एक एकड़ से 5 से 7 लाख रुपये तक की कमाई दिला सकती है। जुलाई–अगस्त में बल्ब रोपाई और अक्टूबर–नवंबर में फूल तुड़ाई के बाद केसर तैयार होता है।

Published On:
saffron is being sold at rupees know how you can start saffron farming

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां बड़ी आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। कुछ किसान वहीं पारंपरिक खेती करते हैं, जबकि कुछ नई सोच अपनाकर अनोखी और महंगी फसलों की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसी ही एक फसल है केसर (Saffron) जिसे मसालों का राजा और सुगंध का सोना कहा जाता है।

केसर सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि एक बहुमूल्य उत्पाद है जो खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ औषधीय उपयोग में भी काम आता है। यही वजह है कि इसकी मांग देश-विदेश दोनों जगह बहुत ज्यादा है। इसकी कीमत सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे एक किलो केसर की कीमत लगभग 5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। अगर वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए, तो यह फसल किसानों को हर साल लाखों रुपये का मुनाफा दिला सकती है।

केसर की खेती के लिए सही माहौल

केसर की खेती ठंडी और शुष्क जलवायु में सबसे अच्छी होती है। इसके लिए ऐसा क्षेत्र चुना जाता है जहां तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहे। भारत में पारंपरिक रूप से जम्मू-कश्मीर इसके उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा में भी इसकी खेती धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है।

मिट्टी की बात करें, तो इसके लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी का pH स्तर 6 से 8 के बीच होना चाहिए। बहुत अधिक नमी या लगातार पानी भर जाने वाले खेतों में केसर नहीं उगाई जा सकती, इसलिए अच्छी जल निकासी की व्यवस्था जरूरी होती है।

बीज नहीं, बल्ब से होती है खेती

केसर की सबसे विशेष बात यह है कि इसे बीज से नहीं, बल्कि “कॉर्म्स” से उगाया जाता है। ये कॉर्म्स यानी बल्ब मिट्टी में लगाए जाते हैं। इनके रोपण का सही समय जुलाई से अगस्त के बीच का होता है।

बल्बों को लगभग 10 सेंटीमीटर गहराई और 10–15 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाता है। ध्यान रहे, इसमें पानी की मात्रा नियंत्रित रखनी होती है, क्योंकि ज्यादा नमी से बल्ब सड़ जाते हैं और फसल खराब हो सकती है। सिंचाई केवल आवश्यकता के अनुसार ही करें, और बरसात के पानी से खेत में जलभराव से बचना जरूरी है।

फसल की देखरेख और कटाई

केसर की फसल में अक्टूबर से नवंबर के बीच फूल खिलते हैं। हर फूल में तीन बारीक और लंबे लाल धागे होते हैं यही असली केसर हैं। इन फूलों को सुबह-सुबह हाथ से तोड़ा जाता है, ताकि उनकी ताजगी बनी रहे। इसके बाद, फूलों से लाल धागों को सावधानी से अलग किया जाता है और फिर इन्हें छांव में सुखाया जाता है सीधी धूप में सुखाने से इसका रंग और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। सूख जाने के बाद इन्हें एयरटाइट कंटेनर में रखकर सुरक्षित किया जाता है। यही तैयार उत्पाद बाजार में ऊंची कीमत पर बिकता है।

खर्च और मुनाफे का गणित

एक एकड़ खेत में केसर की खेती करने के लिए शुरुआती लागत 50,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक आ सकती है। इसमें बल्ब, खेत की तैयारी, सिंचाई, श्रम और अन्य खर्च शामिल हैं।

अगर खेती को सही तकनीक से किया जाए, तो एक एकड़ खेत से करीब 1 से 1.5 किलोग्राम तक केसर का उत्पादन हो सकता है। बाजार में इसकी कीमत 5 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास होती है। यानी किसान आराम से 5 से 7 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं वह भी सिर्फ एक सीजन में।

खेती शुरू करने से पहले क्या ध्यान रखें?

  • ठंडी और सूखी जलवायु वाले क्षेत्र का चयन करें।
  • मिट्टी में जल निकासी अच्छी होनी चाहिए।
  • बल्ब लगाने से पहले मिट्टी में गोबर की खाद डालें।
  • अत्यधिक नमी या बारिश से फसल को बचाएं।
  • फूल निकलते समय खेत की निगरानी बढ़ा दें ताकि नुकसान न हो।
Author
Divya

Leave a Comment

संबंधित समाचार

🔥Hot विडिओ देखें