आजकल हर कोई मोबाइल फोन से जुड़ा रहता है, लेकिन अपने नाम से लिया गया सिम कार्ड किसी और को देना भारी पड़ सकता है। सरकार ने हाल ही में सख्त कदम उठाए हैं ताकि साइबर अपराध रुकें। अगर आपके नंबर से कोई गलत काम होता है, तो जांच में आप ही फंस सकते हैं, भले ही आपने खुद इस्तेमाल न किया हो।

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सिम बांटने की क्यों हो रही मनाही?
लोग अक्सर परिवार या दोस्तों की सुविधा के लिए अपने दस्तावेजों से सिम ले लेते हैं। लेकिन अपराधी इनका फायदा उठाकर फ्रॉड, स्पैम या IMEI बदलकर गड़बड़ियां करते हैं। अब नियम साफ हैं कि सिम का मालिक ही हर हरकत के लिए जिम्मेदार होगा। इससे साइबर सुरक्षा मजबूत हो रही है।
नए नियम क्या कहते हैं?
- एक व्यक्ति के नाम पर सिम की संख्या सीमित रखी गई है, शहरों में ज्यादा तो ग्रामीण इलाकों में कम।
- सिम ट्रांसफर या शेयरिंग बिना पूरी जांच के प्रतिबंधित।
- पुराने या निष्क्रिय नंबरों को तुरंत बंद करवाना जरूरी।
- कॉलर आईडी छिपाने वाले ऐप्स का चलना अवैध माना जाएगा।
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उल्लंघन पर क्या सजा मिलेगी?
गलत इस्तेमाल पकड़े जाने पर जेल हो सकती है, साथ ही भारी आर्थिक दंड। फर्जी दस्तावेजों से सिम लेना या बांटना गैर-जमानती अपराध है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अनभिज्ञता कोई बहाना नहीं चलेगा।
सुरक्षित रहने के आसान उपाय
अपने नाम के सभी सिम की लिस्ट चेक करने के लिए सरकारी ऐप इस्तेमाल करें। नया सिम लेते समय बायोमेट्रिक सत्यापन जरूर कराएं। संदिग्ध नंबर ब्लॉक करें और फोन का IMEI वेरिफाई रखें। थोड़ी जागरूकता से खुद को और अपनों को बचा सकते हैं। अभी कदम उठाएं, वरना पछतावा हो सकता है।
















