
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जनवरी 2026 में मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए ऐतिहासिक फैसला लेते हुए रेंट एग्रीमेंट और संपत्ति पंजीकरण के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, कैबिनेट द्वारा स्वीकृत इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में “ईज ऑफ डूइंग लिविंग” को बढ़ावा देना और कानूनी जटिलताओं को कम करना है।
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रेंट एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन में 90% की भारी कटौती
मकान मालिकों और किरायेदारों को सबसे बड़ी राहत देते हुए सरकार ने रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण पर लगने वाले स्टांप शुल्क और निंधन शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है।
- नया शुल्क: अब वार्षिक किराए के आधार पर रेंट एग्रीमेंट का पंजीकरण महज ₹500 से ₹2500 के बीच कराया जा सकेगा।
- उद्देश्य: महंगे पंजीकरण शुल्क के कारण लोग अक्सर लिखित एग्रीमेंट से बचते थे, जिससे विवाद होने पर कानूनी सुरक्षा नहीं मिल पाती थी। अब कम खर्च में कानूनी रूप से मान्य रेंट एग्रीमेंट बनाना आसान होगा।
पैतृक संपत्ति का बंटवारा अब केवल ₹10,000 में
पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए सरकार ने पैतृक अचल संपत्ति (कृषि, आवासीय या व्यावसायिक) के बंटवारे की रजिस्ट्री को भी बेहद सस्ता कर दिया है।
- फ्लैट शुल्क: अब ऐसी संपत्तियों के बंटवारे की रजिस्ट्री केवल ₹10,000 के फिक्स्ड शुल्क पर की जा सकेगी (₹5,000 स्टांप शुल्क + ₹5,000 निबंधन शुल्क)।
- पात्रता: यह सुविधा तीन पीढ़ियों से अधिक पुराने पारंपरिक वंशजों (उत्तराधिकारियों) के बीच होने वाले बंटवारे पर भी लागू होगी।
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किराया वृद्धि और सिक्योरिटी डिपॉजिट पर कैप
नए नियमों (उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम के तहत) ने मकान मालिकों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट सीमाएं तय की हैं:
- किराया वृद्धि: आवासीय संपत्तियों के लिए सालाना किराया वृद्धि 5% और व्यावसायिक संपत्तियों के लिए 7% तक सीमित कर दी गई है।
- सिक्योरिटी डिपॉजिट: आवासीय भवनों के लिए अधिकतम 2 महीने और गैर-आवासीय (कमर्शियल) संपत्तियों के लिए अधिकतम 6 महीने का किराया ही बतौर सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया जा सकेगा।
डिजिटल रजिस्ट्रेशन और निजता के अधिकार
- 60 दिनों का नियम: रेंट एग्रीमेंट साइन होने के 60 दिनों के भीतर उसका रेंट अथॉरिटी के पास ऑनलाइन पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- बिना सूचना प्रवेश पर रोक: अब मकान मालिक को किरायेदार के परिसर में प्रवेश करने के लिए कम से कम 24 घंटे पहले लिखित या डिजिटल माध्यम से नोटिस देना होगा (आपातकाल को छोड़कर)।
त्वरित विवाद समाधान
किरायेदारी से जुड़े विवादों को निपटाने के लिए सरकार ने रेंट ट्रिब्यूनल की व्यवस्था को मजबूत किया है, अब किराया संबंधी विवादों को अधिकतम 60 दिनों के भीतर हल करने का लक्ष्य रखा गया है।
योगी सरकार के इस कदम से न केवल रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम जनता को तहसील और कोर्ट के चक्करों से भी मुक्ति मिलेगी, रेंट एग्रीमेंट के नए नियम 2026 से प्रदेश भर में प्रभावी रूप से लागू माने जा रहे हैं।
















