
भारत के चुनाव आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। ये कदम इसलिए जरूरी हो गया क्योंकि पिछले कुछ समय में Voter List से नामों को लेकर काफी विवाद हुआ है। आयोग चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया में और भी ज्यादा पारदर्शिता आए। इसीलिए अब मतदाता कार्ड से जुड़े किसी भी काम के लिए आपको अपनी असली पहचान को सत्यापित करना होगा। सीधे शब्दों में कहें तो – अब आप अपने आधार के जरिए ही वोटर लिस्ट में कोई भी बदलाव ला सकते हैं।
Table of Contents
विवाद के बाद सुधार की जरूरत
कुछ महीने पहले की बातें याद करिए। कर्नाटक की आलंद सीट पर बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में इस पर आपत्ति जताई। पूरे देश में इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई। यही वह समय था जब चुनाव आयोग को अहसास हुआ कि मौजूदा व्यवस्था में कमियां हैं। अगर कोई भी व्यक्ति किसी और के नाम से आवेदन दे सकता है, तो ये बेहद खतरनाक है। इसीलिए आयोग ने एक नई तकनीकी व्यवस्था को अमल में लाने का फैसला किया।
पुरानी व्यवस्था कितनी कमजोर थी?
पहले का तरीका बहुत ढीला-ढाला था। आवेदक को बस अपना मतदाता पहचान पत्र नंबर (EPIC) के साथ एक फोन नंबर जोड़ना होता था। इसके बाद निर्वाचन आयोग के ऐप या वेबसाइट पर फॉर्म जमा कर दो। बस! कोई सत्यापन नहीं, कोई जांच नहीं। कोई भी किसी और के लिए आवेदन दे सकता था। यही तो समस्या थी। ऐसे में गलत नामों को हटाना आसान हो गया था।
नई तकनीक कैसे काम करती है?
अब सितंबर 2024 के बाद का नियम बदल गया है। अगर आप वोटर लिस्ट में कोई भी बदलाव चाहते हैं – नाम जोड़ना, हटवाना या सुधार करवाना – तो आपको ‘ई-साइन’ प्रक्रिया से गुजरना होगा। ये क्या होता है? सीधा सा – आपके आधार कार्ड पर जो नाम है, वही मतदाता कार्ड पर भी होना चाहिए। और जो फोन नंबर आप दे रहे हैं, वही आधार से लिंक होना चाहिए।
असली सत्यापन कैसे होता है?
आयोग ने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (CDAC) के साथ मिलकर एक बाहरी पोर्टल तैयार किया है। जब आप फॉर्म भर लेते हैं, तो आपको इसी CDAC पोर्टल पर भेज दिया जाता है। यहां आपको अपना आधार नंबर डालना पड़ता है। इसके बाद आपके आधार से जुड़े फोन नंबर पर एक OTP आता है। जब आप वो OTP डाल देते हैं, तब आपका आवेदन मान्य हो जाता है।
ये बदलाव कितना प्रभावी है?
बेशक, ये एक सकारात्मक कदम है। लेकिन याद रखिए – फॉर्म 7 में अभी भी कोई बदलाव नहीं हुआ। इसमें आपको उस व्यक्ति की पूरी जानकारी देनी होती है, जिसके लिए आवेदन दे रहे हैं। मृत्यु, उम्र, राष्ट्रीयता – सब कुछ का सबूत लगता है। तो फिलहाल, सरकार की ये कोशिश एक सही दिशा में कदम है।
















