Join Contact

Marriage Certificate: शादी का रजिस्ट्रेशन क्यों ज़रूरी? मैरिज सर्टिफिकेट बनाने की पूरी प्रक्रिया और कानूनी फायदे जानें

शादी का पंजीकरण अब केवल औपचारिकता नहीं बल्कि कानूनी अनिवार्यता बन गया है। Marriage Certificate पति-पत्नी की वैधानिक पहचान साबित करता है और वीजा, पासपोर्ट, संपत्ति, लोन, पेंशन जैसे कई सरकारी प्रक्रियाओं में अहम दस्तावेज़ होता है। जानें इसकी प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज़ और फायदे विस्तार से।

Published On:
Marriage Certificate: शादी का रजिस्ट्रेशन क्यों ज़रूरी? मैरिज सर्टिफिकेट बनाने की पूरी प्रक्रिया और कानूनी फायदे जानें

भारत में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और परंपराओं का संगम होता है। पहले विवाह केवल रीति-रिवाजों और धार्मिक कर्मकांडों के जरिए पूरे किए जाते थे। लेकिन अब समय के साथ शादी को केवल सामाजिक नहीं बल्कि कानूनी मान्यता भी देना जरूरी हो गया है। यही काम करता है Marriage Registration यानी विवाह पंजीकरण।

कानूनी सुरक्षा का सबसे अहम प्रमाण

मैरिज सर्टिफिकेट केवल एक काग़ज़ नहीं, बल्कि यह सरकारी रूप से आपके रिश्ते को वैध प्रमाण प्रदान करता है। यह साबित करता है कि पति-पत्नी का रिश्ता कानून के तहत पंजीकृत है। 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय में सभी धर्मों के लिए शादी का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया था, ताकि महिलाओं के अधिकार सुरक्षित रहें और किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में उनके पास कानूनी सुरक्षा हो।

कौन से कानून के तहत होती है शादी का पंजीकरण

अक्सर लोग मानते हैं कि केवल ‘Special Marriage Act’ के अंतर्गत ही पंजीकरण जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं है। हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act, 1955) के तहत होने वाली शादियों का भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।

इस अधिनियम के अनुसार, वर की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और वधु की 18 वर्ष होनी चाहिए। वहीं ‘Special Marriage Act’ में दोनों पक्षों की आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है।

शादी के पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़

शादी का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए दंपति को कुछ जरूरी दस्तावेज़ तैयार रखने होते हैं, जैसे:

  • आवेदन फॉर्म (Application Form)
  • विवाह का निमंत्रण पत्र (Marriage Invitation Card)
  • पति-पत्नी का आयु और निवास प्रमाण पत्र (Age & Address Proof)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • प्रत्येक पक्ष का शपथ पत्र (Affidavit on ₹10 Stamp Paper)

यदि पहले विवाह हुआ हो और तलाक हो चुका हो, तो तलाक आदेश की कॉपी जरूरी है। पूर्व जीवनसाथी की मृत्यु की स्थिति में मृत्यु प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाता है। विदेशी नागरिक से विवाह करने पर उसकी वैवाहिक स्थिति का प्रमाण पत्र भी जोड़ा जाता है। तीन गवाहों के पहचान पत्र और पते का प्रमाण भी जरूरी होता है।

पंजीकरण की प्रक्रिया

विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया अब काफी आसान हो चुकी है। दंपति को अपने क्षेत्र के उप-मंडल अधिकारी (SDM) कार्यालय में आवेदन जमा करना होता है।

  • फॉर्म भरने और दस्तावेज़ वेरिफाई होने के बाद, पंजीकरण की तिथि दी जाती है।
  • हिंदू विवाह अधिनियम के तहत 15 दिनों के भीतर पंजीकरण मिल जाता है।
  • जबकि Special Marriage Act के तहत लगभग 60 दिन का समय लगता है।

कई राज्यों में यह प्रक्रिया अब पूरी तरह Online भी हो चुकी है। जहां Common Service Centre (CSC) या सरकारी पोर्टल के जरिए रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।

मैरिज सर्टिफिकेट कहां-कहां जरूरी होता है

मैरिज सर्टिफिकेट कई कानूनी और प्रशासनिक कार्यों में बेहद महत्वपूर्ण है, जैसे:

  • विदेश यात्रा या वीजा प्रक्रिया में
  • पासपोर्ट आवेदन में Spouse के नाम से
  • संयुक्त संपत्ति खरीदने या बेचने में
  • होम लोन या पेंशन प्रक्रिया में
  • बीमा क्लेम और बैंक खाते खोलने में

यह दस्तावेज़ वैवाहिक स्थिति को प्रमाणित करता है और किसी भी वैवाहिक विवाद में अदालत में मजबूत सबूत के रूप में काम आता है।

Author
Divya

Leave a Comment

संबंधित समाचार

🔥Hot विडिओ देखें