
अब सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति (हाजिरी) दर्ज करने का तरीका पूरी तरह से बदल गया है, शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक आधुनिक डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू कर दी है।
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क्या है नया हाजिरी सिस्टम?
भौतिक रजिस्टर में मैनुअल एंट्री का युग समाप्त हो गया है। नई प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- हाजिरी अब कागज़ के रजिस्टरों में नहीं, बल्कि स्कूलों को उपलब्ध कराए गए टैबलेट या स्मार्टफोन पर एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से दर्ज की जा रही है।
- कई राज्यों में उपस्थिति दर्ज करने के लिए अत्याधुनिक ‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’ (FRS) का उपयोग पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है, जिससे डेटा में हेरफेर की संभावना खत्म हो जाती है।
- उपस्थिति दर्ज होते ही, डेटा सीधे शिक्षा विभाग के केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड हो जाता है, जिससे अधिकारियों को किसी भी समय सटीक जानकारी मिल सके। उदाहरण के लिए, बिहार में यह कार्य ‘ई-शिक्षाकोष’ (E-Shikshakosh) ऐप के माध्यम से किया जा रहा है।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य
इस पहल का लक्ष्य उपस्थिति प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और जवाबदेही तय करना है, यह सटीक डेटा सरकारी योजनाओं, जैसे मध्याह्न भोजन वितरण और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों, की बेहतर निगरानी में भी मदद करेगा।
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CBSE का कड़ा उपस्थिति नियम
इस डिजिटल बदलाव के साथ-साथ, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने भी उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया है, बोर्ड ने घोषणा की है कि 2025-26 सत्र से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने के लिए छात्रों की न्यूनतम 75% उपस्थिति अनिवार्य होगी। मेडिकल इमरजेंसी जैसी विशेष परिस्थितियों में छूट मिल सकती है, लेकिन इसके लिए पुख्ता दस्तावेज जमा करने होंगे।
कुल मिलाकर, शिक्षा क्षेत्र डिजिटलीकरण की ओर अग्रसर है, जिससे स्कूलों के कामकाज में अधिक अनुशासन और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
















