रनिंग को एक बेहतरीन एक्सरसाइज माना जाता है, जो शरीर की कैलोरी बर्निंग, हृदय गति बढ़ाने और वजन कम करने में मदद करती है। लेकिन अक्सर सवाल उठता है कि क्या रनिंग से घुटने खराब या घिस जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सही तरीके से और योग्य ट्रेनिंग के साथ रनिंग करने पर घुटनों को नुकसान नहीं होता, बल्कि यह घुटनों की ताकत और लचीलेपन को बढ़ाता है।

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घुटने खराब होने के पीछे की असली वजह
घुटनों में समस्या तब होती है जब मांसपेशियां कमजोर हों या पटेला (घुटने की टोपी) सही ट्रैक पर न चल पाए। इस स्थिति को पटेला ट्रैकिंग डिसऑर्डर कहा जाता है। गलत तरीके से बिना मसल्स स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के रनिंग शुरू करने से घुटनों में दर्द और तकलीफ हो सकती है। इसलिए, मसल्स की मजबूती बढ़ाने वाली एक्सरसाइज बेहद जरूरी है।
रनिंग के फायदे
- नियमित और सही तरीके से दौड़ने से घुटनों की हड्डियां मजबूत होती हैं और जोड़ का लुब्रिकेशन (चिकनाई) बढ़ता है। इससे गठिया और जोड़ संबंधी समस्याओं का खतरा कम होता है।
- रनिंग हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाकर घुटनों की गतिशीलता को सुधारती है।
- दौरान दौड़ते हुए घुटनों पर पड़ने वाला दबाव सिनोवियल मेंब्रेन से तरल पदार्थ के स्राव को बढ़ाता है, जो जोड़ को चिकना रखता है।
- मसल्स की मजबूती से पटेला सही ट्रैक पर चलता है और घुटनों पर दबाव समान रूप से वितरित होता है।
सावधानियां और सुझाव
- शुरुआत में धीमी गति से दौड़ना चाहिए और धीरे-धीरे गति बढ़ानी चाहिए। अचानक तेज दौड़ने से घुटनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
- सही फिटिंग वाले सपोर्टिव जूतों का उपयोग आवश्यक है ताकि घुटनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
- अधिक वजन वाले लोगों के लिए धीरे-धीरे दौड़ना बेहतर होता है, क्योंकि ज्यादा वजन से घुटनों पर दबाव बढ़ता है।
- मसल्स स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को रनिंग रूटीन में शामिल करना जरूरी है।
- लंबे समय तक लगातार बहुत देर तक दौड़ने से बचना चाहिए ताकि टेंडन और लिगामेंट्स पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
















